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Editorial

जानिए कैसे यूक्रेन रूस संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित प्रभावित कर रहा है?

यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर पड़ सकता है, जिसमें सूरजमुखी तेल की कीमतें, रक्षा उपकरण और मुद्रास्फीति शामिल हैं। भारत के लिए इस संघर्ष में तटस्थ रहना एक समझदारी भरा कदम है।

By Maarg Vaidya5 min read
How The Ukraine-Russia Conflict Impacts Indian Economy
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Key takeaways

  • रूस और यूक्रेन दुनिया में सूरजमुखी के तेल के सबसे बड़े निर्यातक हैं, और भारत अपना अधिकांश तेल इन्हीं दोनों देशों से आयात करता है, जिससे कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
  • रूस दुनिया में हथियारों और सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा निर्यातक है, और अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने से भारत पर रूस के साथ अपने व्यापार, सैन्य और राजनयिक संबंधों को कम करने का दबाव पड़ सकता है।
  • रूस-यूक्रेन संकट के चरम पर यूएस क्रूड ऑयल और ब्रेंट क्रूड की कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जिससे भारत में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • यूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच निफ्टी और सेंसेक्स दोनों चरमरा गए हैं, और India VIX में अचानक उछाल देखा गया है, जो बाजारों में अस्थिरता का सूचक है।
  • भारत ने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया है, यदि आने वाले दिनों में युद्ध के चलते अमेरिका या रूस के साथ रिश्ते खराब होते हैं।

यूक्रेन और रूस युद्ध के कगार पर खड़े हैं। रूस ने यूक्रेन से लगी अपनी सीमा पर करीब एक लाख सैनिक तैनात किए हैं। यूक्रेन को अमेरिका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है। शीत युद्ध के बाद से यह सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों में से एक है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से यह भी घोषणा की, कि रूस 16 फरवरी, 2021 को यूक्रेन पर आक्रमण करेगा। यूक्रेन में कुछ आंतरिक रूस समर्थक अलगाववादी ताकतें हैं, जिन्होंने यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है, जबकि रूस इन बलों का समर्थन करने से इनकार करता है। रूस अपनी मांगों के माध्यम से यूक्रेन के सैन्य और राजनयिक दबदबे को कमजोर करना चाहता है, जैसे कि यूक्रेन को नाटो का समर्थन वापस लेना। स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है और वैश्विक तनाव बढ़ता जा रहा है।

रूस-यूक्रेन संकट में, पक्ष लेना भारत जैसे देशों के लिए एक कूटनीतिक दुर्घटना साबित हो सकती है। जहां USSR के गठन के बाद से भारत के रूस के साथ उत्कृष्ट संबंध रहे हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी इसके उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं। भारत के लिए यह एक समझदारी भरा कदम है, कि वह ऐसे संघर्ष में अपना मत न रखे जिससे देश का भला न हो। इस लेख में, हम भारतीय अर्थव्यवस्था पर पूरे संघर्ष के संभावित प्रभाव को जानेंगे।

सूरजमुखी के तेल की कीमतें आसमानोंको को छू सकती हैं

रूस और यूक्रेन दुनिया में सूरजमुखी के तेल के सबसे बड़े निर्यातक हैं। भारत अपना अधिकांश तेल इन्हीं दोनों देशों से आयात करता है। पिछले एक साल में भारत के खाद्य तेल की कीमतों में लगभग 60% की वृद्धि हुई है। भारत में सूरजमुखी के तेल की उतनी खपत नहीं होती जितनी पाम या सोया तेल की होती है, फिर भी यह दुनिया में सूरजमुखी के तेल का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। कीमतों में बढ़ोतरी से कई भारतीय रसोई-घर प्रभावित हो सकते हैं।

रक्षा और सैन्य उपकरण में भी बढ़त हो सकती हैं

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute – SIPRI) के अनुसार, रूस दुनिया में हथियारों और सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा निर्यातक है, जहां निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत है। अमेरिका रूस और उन लोगों पर प्रतिबंध लगा सकता है, जो ‘युद्ध ‘ के ‘समर्थन’ में हैं। यह संभवतः रूस के साथ अपने व्यापार, सैन्य और राजनयिक संबंधों को कम करने के लिए भारत पर दबाव बना सकता है। भारत के अमेरिका और रूस दोनों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। दोनों के बीच चयन करना एक कठिन कार्य हो सकता है।

महंगाई और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं

यूएस क्रूड ऑयल की कीमतें 95.82 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जबकि ब्रेंट क्रूड 95.75 डॉलर पर पहुंच गया, जब रूस-यूक्रेन संकट अपने चरम पर था। कीमत सिकुड़ गई, जब रूस ने घोषणा की कि वह यूक्रेन के साथ अपने कुछ पोज़िशन्स को वापस ले रहा है। भारत ने तेल और गैस खरीदने के लिए रूस के साथ कई समझौते किए हैं। GAIL ने सालाना 2.5 मिलियन टन (MT) एलएनजी खरीदने के लिए रूसी राज्य के स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनी गज़प्रोम(Gazprom) के साथ 20 साल का समझौता किया है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने रूस की रोसनेफ्ट से 2 मीट्रिक टन तक तेल खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आगे बढ़ते हुए, COVID-19 के चलते  दुनिया भर में मुद्रास्फीति ने आसमान छू लिया है। भारत अन्य देश की तरह ही मुद्रास्फीति के नाव पर सवार  है। उच्च उत्पाद शुल्क और तेल की कीमतों में वृद्धि कई घरों की जेब खाली करवा सकता है।

भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव

यूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच निफ्टी और सेंसेक्स दोनों चरमरा गए हैं। वेलेंटाइन डे पर निफ्टी में 10 महीने में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां निफ्टी 532.95 अंक या 3.06% गिरकर 16,842.8 पर और सेंसेक्स 1747 अंक या 3.00% गिरकर 56,406 पर बंद हुआ। India VIX  बाजारों में अस्थिरता का सूचक है। हम 10 फरवरी के बाद VIX में अचानक उछाल देख सकते हैं, जो यूक्रेन रूस संघर्ष और अन्य बाजार शक्तियों के कारण शायद हुआ  है।

आगे क्या छिपा है

आज के समय में कूटनीति का नेतृत्व किसी विशेष विचारधारा से नहीं बल्कि राष्ट्र के स्वार्थ से होता है। पुतिन के दिमाग में क्या चल रहा है, ये कोई नहीं जानता। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन यूक्रेन पर हमला नहीं करने के लिए सहमत होने पर पुतिन से मिलने के लिए ‘सिद्धांत रूप से’ सहमत हो गए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रॉन नेकूटनीतिक दांव पर लगाया है। उम्मीद है कि दोनों नाटो, ओपेक तेल की कीमत आदि जैसे विभिन्न मुद्दों के शर्तों पर चर्चा कर सकते हैं।

21 फरवरी को, पुतिन ने रूसी सैनिकों को पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में “शांति बनाए रखने” का आदेश दिया। उन्होंने डोनेट्स्क और लुहान्स्क शहरों को स्वतंत्र संस्थाओं के रूप में मान्यता दी। इस कदम को पश्चिमी देशों से व्यापक आलोचना का साथ मिला है, क्योंकि डर है कि यह यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के लिए एक बहाना साबित हो सकता है। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस पर शांति प्रयासों को बर्बाद करने और अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

 शीत युद्ध के दौरान दुनिया वास्तव में विभाजित नहीं थी। जबकि यह संघर्ष अमेरिका और रूस के साथ भारत के सैन्य संबंधों को प्रभावित कर सकता है, यदि मामला गर्म होता है, तो भारत को किसी भी दीर्घकालिक आर्थिक जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा। भारत ने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया है, यदि आनेवाले दिनों में युद्ध के चलते अमेरिका या रूस के साथ रिश्ते खराब होते है। इसके अलावा, भारत के साथ संबंध बनाए रखना रूस और अमेरिका दोनों के लिए सर्वोत्तम आर्थिक और राजनयिक हित में हो सकता है।

Frequently asked questions

यूक्रेन रूस संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकता है?

यूक्रेन रूस संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को कई तरह से प्रभावित कर सकता है, जिसमें सूरजमुखी के तेल की कीमतों में वृद्धि, रक्षा और सैन्य उपकरणों की कीमतों में बढ़त, महंगाई और तेल की कीमतों में वृद्धि, और भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं।

सूरजमुखी के तेल की कीमतें क्यों बढ़ सकती हैं?

सूरजमुखी के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि रूस और यूक्रेन दुनिया में सूरजमुखी के तेल के सबसे बड़े निर्यातक हैं, और भारत अपना अधिकांश तेल इन्हीं दोनों देशों से आयात करता है।

भारत पर रक्षा और सैन्य उपकरणों के संबंध में क्या प्रभाव पड़ सकता है?

भारत पर रक्षा और सैन्य उपकरणों के संबंध में प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि रूस दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है, और अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने से भारत पर रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को कम करने का दबाव पड़ सकता है।

भारतीय बाजारों पर क्या असर पड़ा है?

भारतीय बाजारों पर असर पड़ा है, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स दोनों चरमरा गए हैं, और India VIX में अचानक उछाल देखा गया है, जो बाजारों में अस्थिरता का सूचक है।

Written by

Maarg Vaidya

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