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Editorial

Bisleri : ₹4 लाख से ₹7,000 करोड़ तक की दिलचस्प कहानी

बिसलेरी ने भारत में बोतलबंद पानी के उद्योग में 60% बाजार हिस्सेदारी हासिल की है और पानी का पर्याय बन गया है। यह लेख बिसलेरी की शुरुआत, मार्केटिंग रणनीतियों, चुनौतियों और हाल के घटनाक्रमों पर प्रकाश डालता है।

By Suhani T7 min read
From ₹4 lakh to ₹7,000Cr: The Story of Bisleri
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Key takeaways

  • बिसलेरी मूल रूप से फेलिस बिसलेरी द्वारा बनाया गया एक इटालियन ब्रांड था, जिसे 1965 में भारत में लॉन्च किया गया था।
  • 1969 में, पारले समूह के जयंतीलाल चौहान ने संघर्षरत बिसलेरी को ₹4 लाख रुपये में खरीदा, जिसके बाद इसका विस्तार हुआ।
  • बिसलेरी ने उपभोक्ता-अनुकूल मार्केटिंग रणनीतियों को अपनाया है, जिसमें विभेदक मूल्य निर्धारण और स्थान-आधारित मूल्य निर्धारण शामिल है।
  • बिसलेरी को नकली उत्पादों, बढ़ते कॉम्पिटिशन, बोतलों की दोबारा पैकिंग और वाटर प्यूरीफायर के बढ़ते उपयोग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड कथित तौर पर लगभग ₹7,000 करोड़ में बिसलेरी का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।

“जल ही जीवन है”, क्योंकि पानी के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। पानी पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों के लिए आवश्यक है और एक मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है। दिन भर के काम या यात्रा के बाद हम केवल स्वच्छ पानी की पीने इच्छा रखते हैं। जब हमें पानी की बोतल की आवश्यकता होती है, तो हम अक्सर दुकानदारों से बोलते हैं, "भैया, एक बिसलेरी देना": यह लगभग इतना सहज है। कई बार हो सकता है की, जब हमने बिसलेरी के लिए कहा तो हम में से कुछ लोगों को एक ऑप्शनल ब्रांड मिला होगा।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, बिसलेरी (Bisleri) की सफलता के पीछे क्या कारण है? इसने भारत में बोतलबंद पानी के उद्योग में 60% बाजार हिस्सेदारी कैसे सुरक्षित की और पानी का पर्याय बनने का साहस किया? आगे हम बोतलबंद पानी के सबसे प्रसिद्ध ब्रांडों में से एक, बिसलेरी के बारे में जानेंगे। 

बिसलेरी की शुरुआत 

बिसलेरी मूल रूप से फेलिस बिसलेरी द्वारा बनाया गया एक इटालियन ब्रांड था। 1965 में, इटली के डॉक्टर सेसरी रॉसी और भारतीय व्यवसायी खुशरू सनटूक ने ठाणे में एक कारखाना स्थापित करके भारत में बिसलेरी बोतलबंद पानी की शुरुआत की। यह शुरू में केवल मुंबई के लग्जरी होटलों और रेस्तरां में कांच की बोतलों में दो किस्मों में बेचा जाता था - बबली और स्टिल।1969 तक, ब्रांड संघर्ष कर रहा था। यह भारतीय बाजार से बाहर निकलना चाहता था, उसे पारले समूह के जयंतीलाल चौहान ने ₹4 लाख रुपये (उस समय लगभग 50,000 डॉलर) में खरीदा था।

1969 के बाद बिसलेरी का विस्तार हुआ, जब पारले और बिसलेरी ने एक ही साथ ड्रिंक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और और सोडा का उत्पादन किया। ब्रांड पूरे भारत में फेमस हो गया और विदेशों में विस्तार करने का सोचने लगा। कंपनी सोडा को दो श्रेणियों में बेचने की एक अलग अवधारणा के साथ आई: कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड मिनरल वाटर। इससे भारत में मिनरल वाटर के उत्पादन में बढ़त हुई और  यह आम आदमी की जरूरत बन गया।

बिसलेरी की कंज्यूमर फ्रेंडली मार्केटिंग स्ट्रेटजी 

  • बिसलेरी की प्रोडक्ट स्ट्रेटजी - वर्षों से, कंपनी बढ़ती मांग के जवाब में नए उत्पाद विकसित करता रहा है। बिसलेरी ने अपने पैकेज्ड वॉटर ब्रांड के साथ शुरुआत की थी। यह सफलतापूर्वक चला और श्रृंखला में कई अन्य उत्पादों के लॉन्च की गुंजाइश दी। बिसलेरी के मुख्य उत्पाद (पैकेज्ड वाटर) में कई बदलाव और संशोधन हुए हैं। बाद में, कंपनी ने कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, सोडा, आइसबॉक्स आदि पेश किए। बिसलेरी उच्च गुणवत्ता वाले फेशियल वाइप्स की पेशकश के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • बिसलेरी की प्राइसिंग स्ट्रेटजी - बिसलेरी का लक्ष्य सुरक्षित और किफायती उत्पादों का उत्पादन करना और उन्हें सभी के लिए आसानीसे उपलब्ध कराना है। इसके पैकेज्ड वाटर की कीमत इसके प्रतिस्पर्धियों के समान है। बड़े वॉल्यूम के पैकेज के लिए डिफरेंशियल प्राइसिंग स्ट्रेटजी का इस्तेमाल किया गया है। वॉल्यूम जितना बड़ा होगा, कीमत उतनी ही कम होगी। यदि 1 लीटर बोतल की कीमत ₹20 है, तो ₹2 लीटर बोतल की कीमत ₹30 है। दूसरी ओर, कंपनी लोकेशन -आधारित प्राइसिंग स्ट्रेटेजी तकनीक का भी उपयोग करती है। थिएटर, रेस्तरां और शॉपिंग मॉल में उत्पादों की कीमतें एक विशिष्ट रिटेल दुकान की तुलना में अधिक होती हैं।
  • बिसलेरी की पोजिशनिंग स्ट्रेटजी - 1965 से, कंपनी पूरे भारत में अपनी पहुंच का विस्तार और प्रसार कर रही है। हालांकि, इसके सभी उत्पाद सभी जगह उपलब्ध नहीं हैं। पूर्वी भारत के अलावा हर क्षेत्र में 'वेदिका' (Vedica) ब्रांड की बिक्री होती है। यह पैकेज्ड वाटर सीरीज भारत के सबसे दूरस्थ गांवों में उपलब्ध कराई जाती है।
  • बिसलेरी की प्रमोशनल स्ट्रेटजी - बिसलेरी ने प्रमोशनल गतिविधियों के कई रूपों को अपनाया है जैसे कि टेलीविजन पर विज्ञापन, प्रिंट फॉर्म, व्यक्तिगत बिक्री, होर्डिंग और पोस्टर। ब्रांड के पास अपने अलग-अलग उत्पादों का विवरण देने वाली एक पूरी वेबसाइट भी है।

बिसलेरी के पहले विज्ञापन में प्रसिद्ध वन-लाइनर 'बिसलेरी इज वेरी वेरी एक्सट्राऑर्डिनरी' ने ब्रांड को काफी एक्सपोजर दिया। अन्य उल्लेखनीय अभियानों में 'एक राष्ट्र, एक पानी' शामिल है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से जुड़ने के लिए विभिन्न भाषाओं में लेबलिंग की गई। 'हर पानी की बोतल बिसलेरी नहीं' ने इस विचार को बढ़ावा दिया कि सारा पानी बिसलेरी की तरह शुद्ध और स्वास्थ्यकर नहीं होता।

चुनौतियां 

  • बिसलेरी की पानी की बोतलें इस समय देश में सबसे लोकप्रिय हैं। इसकी भारी सफलता के परिणामस्वरूप, कई अन्य कंपनियों ने बिसलेरी के पानी की बोतल का क्लोन तैयार किया है और इसे बाजार में उतारा है। आप स्थानीय दुकानों में Belsri, Bilseri, Brislei, या Bislaar जैसी पानी की बोतलें देख सकते हैं। इसलिए, बिसलेरी खरीदते समय सतर्क रहें! बिसलेरी ने 'समझदार बिसलेरी पीते हैं' नामक एक नया इंटेग्रटेड 360-डिग्री अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों के विश्वास को बढ़ावा देना और बाजार में असली बिसलेरी और नकली विकल्पों के बीच अंतर के बारे में ग्राहकों को जागरूक करना है।
  • बढ़ता कॉम्पिटिशन और नए प्रवेश: भारतीय बाजार में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर सेगमेंट में भीड़ होती जा रही है। इस आकर्षक उद्योग की निगरानी करने वाले कई उपभोक्ता दिग्गज (जैसे TATA, Nestle, और HUL ) बिसलेरी की बाजार हिस्सेदारी, कमाई और बिक्री को प्रभावित करेंगे।
  • बिसलेरी की बोतलों की दोबारा पैकिंग: कई स्थानीय लोग बिसलेरी की बोतलें इकट्ठा करते हैं और उन्हें स्थानीय अशुद्ध पानी से भरकर बेचते हैं। इससे बिसलेरी की ब्रांड वैल्यू कम हो जाती है और खपत के दौरान यह खतरनाक साबित हो सकता है।
  • लोकल खिलाड़ी: बोतलबंद पानी के बाजार में भाग लेने के लिए कुछ बाधाएं हैं, ऐसे कई प्रतियोगी हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में पैदा हुए और पले-बढ़े हैं। वे उपभोक्ताओं को बेहतर लागत देने और मांग बढ़ाने में सक्षम हैं, क्योंकि वे बिसलेरी की तुलना में एक छोटा व्यवसाय संचालित करते हैं।
  • वाटर प्यूरीफायर: देश में वाटर फिल्टर, प्यूरीफायर और RO की बिक्री में बढ़त का सीधा असर बिसलेरी के कारोबार पर पड़ सकता है।
  • सरकारी रूल्स और रेगुलेशन: पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और प्लास्टिक के उपयोग के लिए सरकारी मानदंड सीधे बिसलेरी के व्यवसाय को प्रभावित कर सकते हैं।

हाल की डेवलपमेंट 

  • फायनांशियल ईयर  2023 के लिए बिसलेरी ब्रांड का कारोबार 250 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ 2500 करोड़ रुपये होने का अनुमान है!
  • बाल दिवस के अवसर पर बिसलेरी इंटरनेशनल प्रा. लिमिटेड ने दिल्ली के युवा चेंजमेकर्स के साथ मिलकर अपने प्रमुख स्थायी कार्यक्रम- 'बॉटल्स फॉर चेंज' के तहत उपयुक्त प्लास्टिक सेग्रीगेशन, निपटान और रीसाइक्लिंग को चलाने के लिए सहयोग किया।
  • बिसलेरी इंटरनेशनल ने पिछले महीने गज़ब स्ट्रीट को लॉन्च करने के लिए गाजियाबाद नगर निगम और IPCA के साथ भागीदारी की, जो रीसायकल प्लास्टिक कचरे का उपयोग करके बनाई गई एक विशिष्ट सड़क है। कचरे और गंदगी से भरी सड़क को सुशोभित करने के उद्देश्य से इस सड़क को संकल्पित किया गया है। 
  • टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड कथित तौर पर लगभग ₹7,000 करोड़ में पैकेज्ड पानी की दिग्गज कंपनी बिसलेरी का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है! टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) के क्षेत्र में आक्रामक है और टॉप पर रहने का लक्ष्य रखती है। यह हिमालयन, टाटा कॉपर प्लस वॉटर और टाटा ग्लूको+ ब्रांड के तहत पैकेज्ड मिनरल वाटर भी बेचता है। बिसलेरी को हासिल करने से उन्हें इस सेगमेंट में नंबर 1 की स्थिति हासिल करने में मदद मिलेगी।

बिसलेरी का मिशन

जिस सोच को कभी पागलपन कहा जाता था, उसके साथ बिसलेरी ने भारत के सीलबंद पानी की बोतल उद्योग में 60% हिस्सेदारी हासिल कर ली है। यह अपना कस्टमर बेस बढ़ाने और उद्योग में अपना नेतृत्व बनाए रखने में सक्षम रहा है।

आज बिसलेरी ने बड़ी उत्पाद श्रृंखला के साथ दो दशकों से भी अधिक समय से बोतलबंद ड्रिंकिंग वाटर के लिए भारतीय बाजार पर अपना दबदबा बनाये रखा है। इसके 122 ऑपरेशनल प्लांट्स (13 खुद के) हैं और भारत और पड़ोसी देशों में 4,500 डिस्ट्रीब्यूटर्स और 5,000 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रकों का एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है, बिसलेरी पिछले 50 वर्षों से उपभोक्ताओं को सुरक्षित, शुद्ध और हेल्दी मिनरल वाटर उपलब्ध कराने के अपने वादे पर खरा है।

भारत में लगभग हर दुकान बिसलेरी की हरी कैप वाली बोतलें बेचती है और यह हर थोक व्यापारी का ट्रेडमार्क बन गया है। टाटा के अधिग्रहण के साथ, क्या यह बिसलेरी की विरासत और शासन के लिए एक प्यारी विदाई होगी, या टाटा इसका पालन-पोषण अच्छी तरह से करेगा और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुँचायेगा? मार्केटफीड ऐप के कमेंट सेक्शन में अपने विचार हमें बताएं!

Frequently asked questions

बिसलेरी की शुरुआत कब हुई थी?

बिसलेरी की शुरुआत 1965 में हुई थी, जब इटली के डॉक्टर सेसरी रॉसी और भारतीय व्यवसायी खुशरू सनटूक ने ठाणे में एक कारखाना स्थापित करके भारत में बिसलेरी बोतलबंद पानी की शुरुआत की।

बिसलेरी को पारले समूह ने कितने में खरीदा था?

बिसलेरी को पारले समूह के जयंतीलाल चौहान ने ₹4 लाख रुपये (उस समय लगभग 50,000 डॉलर) में खरीदा था।

बिसलेरी की वर्तमान बाजार हिस्सेदारी कितनी है?

बिसलेरी ने भारत के सीलबंद पानी की बोतल उद्योग में 60% हिस्सेदारी हासिल कर ली है।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड कितने में बिसलेरी का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है?

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड कथित तौर पर लगभग ₹7,000 करोड़ में पैकेज्ड पानी की दिग्गज कंपनी बिसलेरी का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।

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Suhani T

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