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Editorial

भारत के ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग का विश्लेषण!!

भारत ने अगले 30 वर्षों के भीतर डी-कार्बोनाइज करने की योजना की घोषणा की है और ग्रीन हाइड्रोजन के विकास और उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह लेख भारत के ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग का विश्लेषण करता है और इस क्षेत्र के टॉप खिलाड़ियों की पहचान करता है।

By Cherian Varghese7 min read
An Analysis of India's Green Hydrogen Industry
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Key takeaways

  • भारत ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और महंगे आयात में कटौती करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन के विकास और उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके प्राप्त किया जाता है, और यह एक स्वच्छ जलने वाला मॉलिक्यूल है।
  • अगस्त 2021 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के लिए एक वैश्विक केंद्र में बदलना है।
  • फरवरी 2022 में, भारत सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति पेश की, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, GAIL (इंडिया) लिमिटेड, NTPC, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) भारत में ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति का नेतृत्व करने वाली शीर्ष कंपनियों में से हैं।

भारत ने अगले 30 वर्षों के भीतर डी-कार्बोनाइज करने की योजना की घोषणा की है। सरकार ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और महंगे आयात में कटौती करने के लिए रणनीतिक निर्णय लिए हैं। हमारे देश के 2022 तक रिन्यूएबल एनर्जी के 175 गीगावाट (GW) प्राप्त करने के लक्ष्य को नई नीतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों के हिस्से के रूप में, भारत अब एनर्जी सोर्स के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास और उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इस लेख में, हम एक ऐसे इंडस्ट्री का विश्लेषण करेंगे जो धीरे-धीरे विकसित हो रही है और जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है- ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी इंडस्ट्री! हम यह भी पता जानेंगे, कि इस क्षेत्र के टॉप खिलाड़ी कौन से हैं।

वास्तव में ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

विश्व में हाइड्रोजन सबसे कॉमन एलिमेंट है। हालांकि, यह केवल अन्य एलिमेंट्स के साथ कंपाउंड के रूप में मौजूद है। हाइड्रोजन आमतौर पर पानी जैसे कंपाउंड से निकाला जाता है, और यह प्रक्रिया काफी एनर्जी -इंटेंसिव हो सकती है। उन स्रोतों और प्रक्रियाओं के आधार पर जिनसे हाइड्रोजन प्राप्त होता है, इसे तीन कैटेगरी में डिवाइड किया जा सकता है:

  1. जीवाश्म ईंधन (मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस) से निर्माण होने वाले हाइड्रोजन को ग्रे हाइड्रोजन कहा जाता है।
  2. ब्लू हाइड्रोजन कार्बन कैप्चर और स्टोरेज विकल्पों के साथ जीवाश्म ईंधन से निर्माण होता है।
  3. और अंत में, सोलर, विंड और जियोथर्मल एनर्जी जैसे रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स से निर्माण होने वाले हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके प्राप्त किया जाता है। इस रासायनिक प्रक्रिया को इलेक्ट्रोलिसिस के रूप में जाना जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन का मुख्य फायदा यह है कि यह एक स्वच्छ जलने वाला मॉलिक्यूल है। यह लोहा और स्टील, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है। वास्तव में, यह एक रेवोलुशनरी कांसेप्ट है।

ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री 

क्योंकि ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा के सबसे क्लीन रूपों में से एक है, इसलिए इसे अब नेट-जीरो एमिशन प्राप्त करने का सबसे अच्छा सलूशन माना जाता है। कई देश अब ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। इस बीच, भारत ने भी ग्रीन पहल का समर्थन करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

  • अगस्त 2021 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन (National Hydrogen Energy Mission) का शुभारंभ किया और भारत को ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के लिए एक वैश्विक केंद्र में बदलने के अपने निर्णय की घोषणा की। 2021 और 2024 के बीच, सरकार अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में 800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जिसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन की लागत को कम करना है।
  • भारत का मौजूदा एनर्जी इंपोर्ट बिल सालाना 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। आनेवाले भविष्य में कोयले और तेल पर हमारी निर्भरता 2-3 गुना बढ़ने की संभावना है। इस प्रकार, नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन महंगे तेल इंपोर्ट पर हमारी निर्भरता को रोकने में मदद करेगा। लॉन्ग टर्म में ऊर्जा खपत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन एक आवश्यकता बन जाएगी।
  • फरवरी 2022 में, भारत सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति पेश की। यह 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन के प्रोडक्शन का लक्ष्य रखता है। इस नीति के तहत, जुलाई 2025 से पहले ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए बिजली की आपूर्ति के लिए स्थापित एक रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट को 25 साल का फ्री पावर ट्रांसमिशन मिलेगी! यह नीति ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में कम्पेटेटर्स के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना लाएगी।
  • ऑटोमोबाइल सेक्टर को बिजली देने के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए भी पर्याप्त उपाय किए जा रहे हैं। हम जल्द ही भारतीय सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाले कई वाहनों को दौड़ते हुए देख पाएंगे!

अब, हम भारत में ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति का नेतृत्व करने वाली टॉप 5 कंपनियों पर नजर डालते हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अत्यधिक महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में प्रवेश किया है।
  • अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने अगले तीन वर्षों में सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी और ईंधन सेल्स में $ 10 बिलियन (या 75,400 करोड़ रुपये) का निवेश करने के लिए एक रोडमैप का खुलासा किया था।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने गुजरात के जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स को भी विकसित करना शुरू कर दिया है। यह 60,000 करोड़ रुपये की परियोजना एक एकीकृत सुविधा होगी जो सोलर सेल्स और मॉड्यूल, बैटरी, ईंधन सेल्स और ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए एक इलेक्ट्रोलाइज़र प्लाट जैसे घटकों का निर्माण करती है।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स के विकास और निर्माण के लिए डेनिश कंपनी Stiesdal A/S के साथ अपनी सहायक कंपनी Reliance New Energy Solar Ltd के माध्यम से भागीदारी की है।
  • रिलायंस ने 2030 तक 1 डॉलर प्रति किलोग्राम की दर से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की कसम खाई है।

GAIL (इंडिया) लिमिटेड

  • GAIL वर्तमान में हमारे देश में सबसे बड़े ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के निर्माण पर काम कर रहा है क्योंकि यह कार्बन मुक्त ईंधन के साथ अपने प्राकृतिक गैस कारोबार को पूरक बनाने की कोशिश कर रहा है।
  • इसने हाल ही में एक इलेक्ट्रोलाइजर की खरीद के लिए एक ग्लोबल निविदा जारी की, थी जो प्रतिदिन 4.5 टन हाइड्रोजन का उत्पादन कर सकती है।
  • कंपनी ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रमुख शहरों की प्राकृतिक गैस प्रणालियों में हाइड्रोजन का मिश्रण भी शुरू कर दिया है।

NTPC

  • राज्य के स्वामित्व वाली NTPC की योजना व्यावसायिक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की है।
  • NTPC कच्छ के रण में 4,750 मेगावाट अक्षय ऊर्जा पार्क स्थापित करेगी।
  • कंपनी उत्तर प्रदेश में अपनी एक इकाई में एक पायलट प्रोजेक्ट चला रही है, जहां हाइड्रोजन की लागत लगभग 2.8-3 डॉलर प्रति किलोग्राम होने का अनुमान है।
  • NTPC ने लेह, लद्दाख में अपना पहला ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन स्टेशन स्थापित करने की भी योजना बनाई है।
  • PSU का लक्ष्य 2032 तक 60 गीगावाट (GW) नवीकरणीय क्षमता हासिल करना है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)

  • IOC की उत्तर प्रदेश में अपनी मथुरा रिफाइनरी में ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र बनाने की योजना है। इकाई की क्षमता लगभग 1.6 लाख बैरल प्रतिदिन होने की संभावना है।
  • कंपनी ने आने वाले वर्षों में रिफाइनरियों में अपनी हाइड्रोजन खपत का कम से कम 10% ग्रीन हाइड्रोजन में बदलने का लक्ष्य रखा है।
  • IOC का लक्ष्य कोच्चि, केरल में एक स्टैंडअलोन ग्रीन हाइड्रोजन निर्माण इकाई स्थापित करना भी है। यह इकाई कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की सौर ऊर्जा सुविधा से ऊर्जा प्राप्त करेगी।

लार्सन एंड टुब्रो(L&T )

  • लार्सन एंड टुब्रो ने भारत में एक अल्कलाइन वाटर इलेक्ट्रोलिसिस यूनिट स्थापित करने के लिए नॉर्वे स्थित हाइड्रोजनप्रो ASके साथ एक प्रमुख समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • उन्होंने अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित करने की भी योजना बनाई है।
  • L&T ने हाल ही में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और नैस्डैक-सूचीबद्ध रीन्यू पावर के साथ भारत में एक ग्रीन हाइड्रोजन व्यवसाय विकसित करने के लिए एक जॉइंट वेंचर के गठन की घोषणा की।
  • L&T ने 2040 तक शुद्ध-शून्य कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में ग्रीन पहल पर 1,000-5,000 करोड़ रुपये का निवेश करना है।

निष्कर्ष

भारत का ग्रीन हाइड्रोजन बाजार अभी छोटे पौधे की अवस्था में है। हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन एक महंगा काम है, जिसमें सबसे बड़ी लागत इलेक्ट्रोलाइजर है। हाइड्रोजन को स्थानांतरित/परिवहन करना भी काफी महंगा है। बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग इस तरह की लागत को कम कर सकता है। हालांकि, वर्तमान में मांग सीमित है और प्रोडक्शन क्षमता कम है।

इन चुनौतियों के बावजूद, हमारी सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के रिसर्च और डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रारंभिक कदम उठाए हैं। 2017 में, भारतीय हाइड्रोजन बाजार का मूल्य $50 मिलियन था। यह बाजार 2025 तक बढ़कर 81 मिलियन डॉलर होने की उम्मीद है! कोई आश्चर्य नहीं, कि बहुत सी कंपनियां इस अत्यधिक आशाजनक क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं! उन्होंने ऊर्जा स्रोत के रूप में हाइड्रोजन की क्षमता का उपयोग करना शुरू कर दिया है। कई उत्पादन लागत को कम करने और वैकल्पिक उपयोग के मामलों को खोजने के तरीकों की जांच कर रहे हैं। नागरिकों के रूप में, हम ग्रीन हाइड्रोजन के पीछे की तकनीक और पर्यावरण को इसके लाभ के बारे में जागरूकता पैदा कर सकते हैं।

भारत में विकसित हो रहे ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री पर आपके क्या विचार हैं? मार्केटफीड ऐप के कमेंट सेक्शन में हमें अपने विचार बताएं!

Frequently asked questions

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके प्राप्त किया जाता है, और यह एक स्वच्छ जलने वाला मॉलिक्यूल है।

भारत सरकार का ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य क्या है?

भारत सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।

नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन कब शुरू किया गया था?

नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन अगस्त 2021 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था।

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग में कौन सी कंपनियां शामिल हैं?

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, GAIL (इंडिया) लिमिटेड, NTPC, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

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